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क्या शतक लगेगा

Posted by on Oct 16th, 2011 and filed under खास खबर, खेल कूद. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

फिरोजशाह कोटला मैदान में रविवार को पिछले 15 साल से किसी भी भारतीय ने सैकड़ा नहीं जड़ा है.

कई रिकार्ड और उपलब्धियों का गवाह रहा फिरोजशाह कोटला स्टेडियम यूं तो भारतीय क्रिकेट टीम के लिए काफी भाग्यशाली रहा है लेकिन एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में इससे कुछ ऐसे मिथक जुड़े हुए हैं जो साल दर साल मैच होने के बावजूद टूटने का नाम नहीं ले रहे हैं.

इनमें सबसे बड़ा मिथक इस मैदान पर उन खिलाड़ियों का वन-डे में असफल रहना है जिनका यह घरेलू मैदान रहा है या जिन्होंने यहां से अपने क्रिकेट जीवन की शुरुआत की.

दूसरा मिथक भारतीय बल्लेबाज यहां शतक लगाने के लिए तरसते रहे हैं और आलम यह है कि पिछले 15 साल से किसी भी भारतीय ने कोटला मैदान पर सैकड़ा नहीं जड़ा है.

मोहिंदर अमरनाथ, मदनलाल, मनोज प्रभाकर से लेकर वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर और विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों के लिए कोटला का मैदान वन-डे मैचों में भाग्यशाली नहीं रहा है.

भारत और इंग्लैंड के बीच कल होने वाले दूसरे एकदिवसीय मैच में गंभीर और कोहली के पास यह मिथक तोड़ने का सुनहरा मौका होगा.

गंभीर ने अब तक कोटला में चार वनडे मैच खेले हैं. जिनमें 19.66 की औसत 59 रन बनाए हैं. इस मैदान पर उनका उच्चतम स्कोर 28 रन है. युवा बल्लेबाज कोहली भी अपने इस घरेलू मैदान पर दो मैच खेल चुके हैं. जिनमें उनके नाम पर 12 रन दर्ज हैं.

सहवाग ने अपने बल्ले का डंका दुनिया के हर मैदान पर बजाया है लेकिन कोटला कभी उनके लिये शुभ नहीं रहा. सहवाग भले ही चोटिल होने के कारण इस श्रृंखला में नहीं खेल रहे हैं लेकिन वह अब तक इस मैदान छह मैच खेल चुके हैं. जिनमें उन्होंने 24.00 की औसत से केवल 120 रन बनाए हैं. कोटला पर उनका सर्वाधिक स्कोर 42 रन है.

यह सिलसिला वैसे बहुत पहले से चला आ रहा है. इसमें रमन लांबा और मनिंदर सिंह जैसे एक दो अपवाद जरूर रहे. लांबा ने कोटला पर तीन मैच में 192 रन बनाए. जिनमें उनका उच्चतम स्कोर 74 रन रहा. मनिंदर ने इस मैदान पर तीन मैच में 18.80 की औसत से पांच विकेट लिए हैं. इन दोनों के अलावा दिल्ली के जितने भी खिलाड़ी कोटला पर वन-डे मैचों में खेले उन्होंने अपने स्थानीय प्रशंसकों को निराश ही किया.

भारत की 1983 की विश्व कप जीत के नायक मोहिंदर अमरनाथ कोटला पर दो मैच में केवल 23 रन बना पाए हैं. उनके साथी मदनलाल ने यहां तीन मैच में दो विकेट लिए हैं.

आलराउंडर प्रभाकर भी यहां तीन मैच में दो विकेट ले पाए हैं जबकि उनके नाम पर दो पारियों में केवल आठ रन दर्ज हैं. आशीष नेहरा (चार मैच में चार विकेट), राहुल संघवी (एक मैच में एक विकेट) और निखिल चोपड़ा (एक मैच में कोई विकेट नहीं) भी यहां अपना जलवा नहीं दिखा पाए.

यदि शतक की बात करें तो कोटला पर 15 सितंबर 1982 को पहला वन-डे मैच खेला गया था. भारत अब तक इस मैदान पर 15 मैच खेल चुका है लेकिन इनमें भारत की तरफ से केवल एक सैकड़ा लगा है.

यह शतक (नाबाद 137 रन) भी सचिन तेंदुलकर ने मार्च 1996 में श्रीलंका के खिलाफ विश्व कप मैच में बनाया था.

भारत ने इसके बाद कोटला पर नौ मैच खेल लिए हैं लेकिन तब से कोई भी भारतीय बल्लेबाज यहां शतक नहीं लगा पाया. पिछले 15 साल में इस मैदान पर किसी भारतीय बल्लेबाज का सर्वाधिक स्कोर 78 रन है. जो युवराज सिंह ने 2009 में आस्ट्रेलिया के खिलाफ बनाया था. इसी मैच में महेंद्र सिंह धोनी ने नाबाद 71 रन बनाए थे.

वैसे इस बीच विदेशी बल्लेबाजों ने यहां जरूर शतक ठोके. आस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग ने 1998 में जिम्बाब्वे के खिलाफ 145 रन (इस मैदान पर सर्वाधिक व्यक्तिगत पारी), इंग्लैंड के निक नाइट ने 2002 में भारत के खिलाफ 105 रन और एबी डिविलियर्स ने इस साल विश्व कप में वेस्टइंडीज के खिलाफ नाबाद 107 रन बनाये थे.

भारत ने वैसे कोटला पर अभी तक जो 15 मैच खेले हैं. उनमें से नौ में उसे जीत और पांच में हार मिली है.जबकि श्रीलंका के खिलाफ एक मैच पिच खराब होने के कारण रद्द हुआ था.

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