हुवाई समस्या का सबसे बुरा असर पड़ा व्यापार पर : रिपोर्ट

टोरंटो। कैनेडा के एक प्रख्यात अमेरिकी न्यूज रिपोर्ट के अनुसार यद्यपि दो माह पश्चात हुवाई मुद्दा काफी हद तक हल कर लिया गया हैं, परंतु इसका सबसे बुरा असर अमेरिका और चीन के व्यापारिक रिश्तों पर पड़ा, दुनिया की दो शक्तिशाली अर्थव्यवस्थाओं के मध्य एक कड़वाहट पैदा हो गई, जिससे दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी बुरा प्रभाव पड़ा हैं। गौरतलब हैं कि सिएटल में हुवोई डिवाइस कंपनी के खिलाफ व्यापार संबंधी खुफिया जानकारी चुराने सहित वायर धोखाधड़ी के सात आरोप और न्याय में बाधा डालने के संबंध में एक आरोप दर्ज किया गया है। आरोपों के अनुसार हुवोई ने यह चोरी 2012 में शुरू की थी। खुफिया मामलों पर सीनेट की चयन समिति के उपाध्यक्ष सीनेटर मार्क वार्नर ने ट्रम्प प्रशासन की सराहना की और अमेरिका से चीन की आईपी चोरी को व्यापार वार्ता में प्राथमिकता देने का आग्रह किया। गौरतलब है कि यूरोपीय संघ में चीन के राजदूत ने गत सोमवार को कहा था कि चीन की प्रौद्योगिकी कंपनी हुवोई, पश्चिम की सरकारों द्वारा उसके खिलाफ झूठी अफवाहें फैलाए जाने का शिकार बनी है। ज्ञात हो कि बहरहाल व्हाइट हाउस ने सोमवार को इन दोनों घटनाओं के बीच किसी भी तरह का संबंध होने की बात को नकार दिया। अमेरिकी न्याय मंत्रालय ने हुआवेई और उसकी मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) मेंग वानझोऊ पर वित्तीय धोखाधड़ी सहित 13 आरोप लगाए हैं। कंपनी के संस्थापक की बेटी मेंग अभी जमानत पर है। वह कैनेडा में हैं। इस मामले से औटवा और बीजिंग के बीच भी व्यापक तनाव उत्पन्न हो गया है और वाशिंगटन इसके बीच में है। हुवोई, उसकी सीएफओ और अन्य कर्मियों पर ईरान में हुवोई की व्यावसायिक गतिविधियों के बारे में कई वैश्विक वित्तीय संस्थानों और अमेरिकी सरकार को धोखा देने का आरोप भी लगाया गया है। कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल मैथ्यू जी व्हाइटेकर ने सोमवार को कहा, आज हम टेलीकॉम कंपनी हुवाई और उससे जुड़े करीब 20 से अधिक लोगों के खिलाफ आरोप लगाने की घोषणा करते हैं। वार्क ने बताया कि अमेरिकी नीतियों के अनुरुप दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए प्रयास किया जा रहा हैं और इसी के मद्देनजर वार्ता का आयोजित किया गया, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी उप प्रधानमंत्री ल्यु ने हिस्सा लिया और यह वार्ता दो दिवसीय चली, इस भेंटवार्ता में ट्रंप ने माना कि वह पिछली बातों पर अब कोई भी चर्चा नहीं चाहते बल्कि सब कुछ भुलाकर आगे की व्यापारिक नीतियों पर कार्य करेंगे। दोनों देशों के व्यापारिक विनिमय का लाभ सभी को होगा और भविष्य में भी एक मजबूत आर्थिक स्थिति का निर्माण हो सकेगा।
You might also like

Comments are closed.