प्रचार खर्चों में लिबरल्स और टोरीज में बराबरी की टक्कर

औटवा। आगामी चुनावों के लिए लिबरल्स और कंसरवेटिवस में इस बार जहां जीत के लिए बराबरी की टक्कर होगी वहीं चुनाव से पूर्व प्रचार मुद्रा में भी दोनों पार्टियों में समानता रहने की उम्मीद जताई जा रही हैं। माना जा रहा है कि इस बार दोनों पार्टियां एक-दूसरे से अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रयास करेगी। मीडिया को बताई सूचना के अनुसार देश में लाल और नीले उम्मीदवारों की झड़ी लगने वाली हैं जिन्हें आप अपने निकटवर्ती ईलाकों में कहीं भी अपनी पार्टी के प्रचार में लगा देख सकते हैं। वर्ष 2018 में प्राप्त वार्षिक आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार जहां कंजरवेटिवस ने अपनी प्रसिद्धी से 24.2 मिलीयन की संपत्ति अर्जित की वहीं लिबरलस इसमें कोई बहुत अधिक पीछे नहीं थी उनके पास भी 21 मिलीयन डॉलर की संपत्ति का ब्यौरा स्पष्ट था। जानकारों के अनुसार दोनों प्रमुख पार्टियों के संबंध देश के टॉप 20 अमीरों से हैं जिसके कारण उन्हें कभी भी प्रचार मुद्रा में कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। आंकड़ों की इस कमी को जल्द ही लिबरलस पाट लेगा, ऐसी उम्मीद जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि वर्ष 2014 के पश्चात लिबरलस के खाते में दोगुनी वृद्धि भी उसके लिए अच्छा सूचक हैं, जिसका प्रतिफल आगामी अक्टूबर में मिलेगा और ज्ञात होगा कि वास्तव में इतनी अधिक लिबरलस के साथ हैं या ये सब भ्रम हैं।
इन चुनावों में सबसे अधिक परेशानी एनडीपी को होने वाली हैं जिनके बजट में 3.8 मिलीयन डॉलर एकत्र हैं जिसके कारण आगामी चुनावी प्रचार और अन्य खर्चों को पार्टी कैसे वहन कर पाएंगी, जानकारों के अनुसार यह भी चिंता जताई जा रही हैं कि पार्टी के साथ देश के उच्च 100 अमीर लोग भी नहीं जुड़े हैं, जिससे आगामी दिनों में इसके प्रचार-प्रसार होने वाले कार्यों को कैसे संतुलित किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार ग्रीन की स्थिति 735,000 डॉलर के साथ कुछ सुधरी हुई हैं, रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पार्टी द्वारा कुछ सीमित क्षेत्रों में उम्मीदवारी करने से पार्टी का प्रचार खर्चा कम आएगा, जिसे वे प्रचार मुद्रा के अनुसार खर्च कर सकते हैं, उन्हें अधिक परेशानी नहीं होगी। वर्ष 2018 के आंकड़ों के अनुसार कंजरवेटिवस और लिबरलस को इन चुनावों में किसी भी प्रकार की आर्थिक परेशानी नहीं होगी और इसके कारण इस बार का मुकाबला भी बहुत अधिक कड़ा हो सकता हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीपी और ग्रीन मिलकर अपने प्रचार कार्यक्रमों को कार्यन्वित करके प्रमुख दोनों पार्टियों को टक्कर दे सकते हैं।

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