हाइड्रो वन बोर्ड और सीईओ हुआ ‘आऊट’
सामूहिक इस्तीफे से हाइड्रो वन के बोर्ड सदस्यों और सीईओ ने जताई अपनी नाराजगीटोरंटो। सूत्रों के अनुसार हाइड्रो वन के सीईओ और बोर्ड ने सामूहिक इस्तीफा देकर ओंटेरियो में एक बड़ी हलचल पैदा कर दी हैं। इस इस्तीफे के पश्चात प्रीमियर डाग फोर्ड ने अपने संबोधन में कहा कि हाइड्रो वन बोर्ड और सीईओ के अपने आप पद मुक्त होने से वह बहुत अधिक प्रसन्न हैं, उन्होंने कहा कि मुझे इसके लिए कोई मेहनत ही नहीं करनी पड़ी जैसा वह सोच रहे थे। ज्ञात हो कि हाइड्रो वन के सीईओ मायो स्कमीडटस अपने पद से सेवानिवृत्त हो रहे थे, जिसके पश्चात पूरे हाइड्रो वन के निदेशकों के बोर्ड ने यह फैसला लिया कि नए परिवर्तनों से पूर्व वे अपने-अपने पदों से स्वयं ही निष्कासित हो जाएं, जिससे उन्हें बाद में अधिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े, आंतरिक सूत्रों के अनुसार यह माना जा रहा हैं कि फोर्ड के शपथ लेने के दो हफ्तों के अंदर ही पूरे हाइड्रो वन ने अपना इस्तीफा दे दिया, जिसके कारण पूरे प्रांत में हलचल मच गई हैं। बिजली आपूर्ति की व्यवस्थाओं को लेकर लोगों में संशय का माहौल विद्यमान हैं। फोर्ड ने अपने संदेश में कहा कि उनके चुनावी वादे को पूरा करने में उन्हें अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ी, इसके लिए स्वयं सीईओ और बोर्ड सदस्यों ने यह निर्णय लिया। ज्ञात हो कि फोर्ड अपने अधिकतर चुनावी
सभाओं में बोर्ड व सीईओ को बर्खास्त करने की बात दोहराते थे, जिसके कारण यह सुनिश्चित था कि वे जल्द ही इस कोई न कोई कार्यवाही अवश्य करते। उन्होंने आगे कहा कि बुधवार लोगों के लिए एक ‘ग्रेट-डे’ हैं, जिस दिन उन्हें लालची लोगों से मुक्ति मिली, वे हाइड्रो वन के सीईओ को 6 मिलीयन का आदमी करके संबोधित करते थे, क्योंकि उनका वेतन 6.2 मिलीयन डॉलर था, जो बात आजतक फोर्ड को हजम नहीं हो पा रही थी। उन्होंने बोर्ड पर आरोप लगाया कि एक सीईओ का इतना अधिक वेतन होने पर भी बोर्ड ने कभी कोई आपत्ति नहीं जताई जिसके लिए उन्हें बोर्ड पर भी नाराजगी थी, फोर्ड के अनुसार इस पूरी प्रणाली में बहुत से घोटाले थे, जिसके कारण लोगों के साथ धोखा हो रहा था, और जल्द ही यह समाप्त होना चाहिए था, परंतु उन्हें इसके लिए कोई मेहनत ही नहीं करनी पड़ी और स्वयं ही बोर्ड के सदस्यों ने अपना इस्तीफा दे दिया और हाइड्रो वन के सीईओ ने अपनी सेवानिवृति के कारण अपने पद को छोड़ दिया।जारी दस्तावेजों से यह पता लगता हैं कि पार्ट टाईम कार्यरत बोर्ड ने वर्ष 2018 में अपना वेतन बढ़ाकर 160,000 डॉलर से 185,000 डॉलर कर लिया, जिसके अंतर्गत आधी राशि मुआवजा नकद में और आधी राशि शेयरों के रुप में मिलती थी, बोर्ड अध्यक्ष डेविड डेनीसन का वेतन 260,000 डॉलर से बढ़ाकर 330,000 डॉलर कर दिया गया था, जिससे ज्ञात होता हैं कि कंपनी में बढ़ोत्तरी के नाम पर भारी लूट हो रही थी। वहीं दूसरी ओर एनडीपी के ऊर्जा समीक्षक पीटर टाबन्स का कहना हैं कि यह गुप्त डील फोर्ड के साथ हाइड्रो वन के बोर्ड सदस्यों ने पहले ही कर ली, जिससे जनता की नजर में फोर्ड एक महान दूरदर्शी सिद्ध हो सके, मोटी रकम खाकर सभी बोर्ड सदस्यों ने अपने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया, जबकि उन्हें पता था कि अगर उन्होंने किसी प्रकार की कोई त्रुटि नहीं की हैं तो वह अभी अपनी सेवानिवृत्ति तक अपने पदों पर बने रहेंगे उन्हें कोई भी नहीं हटा सकता चाहे वह राज्य का प्रीमियर ही क्यों न हो। इस पूरे मामले की गहन जांच होनी चाहिए उसके पश्चात ही इन इस्तीफो को मंजूरी देनी चाहिए।
सभाओं में बोर्ड व सीईओ को बर्खास्त करने की बात दोहराते थे, जिसके कारण यह सुनिश्चित था कि वे जल्द ही इस कोई न कोई कार्यवाही अवश्य करते। उन्होंने आगे कहा कि बुधवार लोगों के लिए एक ‘ग्रेट-डे’ हैं, जिस दिन उन्हें लालची लोगों से मुक्ति मिली, वे हाइड्रो वन के सीईओ को 6 मिलीयन का आदमी करके संबोधित करते थे, क्योंकि उनका वेतन 6.2 मिलीयन डॉलर था, जो बात आजतक फोर्ड को हजम नहीं हो पा रही थी। उन्होंने बोर्ड पर आरोप लगाया कि एक सीईओ का इतना अधिक वेतन होने पर भी बोर्ड ने कभी कोई आपत्ति नहीं जताई जिसके लिए उन्हें बोर्ड पर भी नाराजगी थी, फोर्ड के अनुसार इस पूरी प्रणाली में बहुत से घोटाले थे, जिसके कारण लोगों के साथ धोखा हो रहा था, और जल्द ही यह समाप्त होना चाहिए था, परंतु उन्हें इसके लिए कोई मेहनत ही नहीं करनी पड़ी और स्वयं ही बोर्ड के सदस्यों ने अपना इस्तीफा दे दिया और हाइड्रो वन के सीईओ ने अपनी सेवानिवृति के कारण अपने पद को छोड़ दिया।जारी दस्तावेजों से यह पता लगता हैं कि पार्ट टाईम कार्यरत बोर्ड ने वर्ष 2018 में अपना वेतन बढ़ाकर 160,000 डॉलर से 185,000 डॉलर कर लिया, जिसके अंतर्गत आधी राशि मुआवजा नकद में और आधी राशि शेयरों के रुप में मिलती थी, बोर्ड अध्यक्ष डेविड डेनीसन का वेतन 260,000 डॉलर से बढ़ाकर 330,000 डॉलर कर दिया गया था, जिससे ज्ञात होता हैं कि कंपनी में बढ़ोत्तरी के नाम पर भारी लूट हो रही थी। वहीं दूसरी ओर एनडीपी के ऊर्जा समीक्षक पीटर टाबन्स का कहना हैं कि यह गुप्त डील फोर्ड के साथ हाइड्रो वन के बोर्ड सदस्यों ने पहले ही कर ली, जिससे जनता की नजर में फोर्ड एक महान दूरदर्शी सिद्ध हो सके, मोटी रकम खाकर सभी बोर्ड सदस्यों ने अपने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया, जबकि उन्हें पता था कि अगर उन्होंने किसी प्रकार की कोई त्रुटि नहीं की हैं तो वह अभी अपनी सेवानिवृत्ति तक अपने पदों पर बने रहेंगे उन्हें कोई भी नहीं हटा सकता चाहे वह राज्य का प्रीमियर ही क्यों न हो। इस पूरे मामले की गहन जांच होनी चाहिए उसके पश्चात ही इन इस्तीफो को मंजूरी देनी चाहिए।
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