लीमा समूह ने वेनेजुएला के अधिकारियों पर लगायी पाबंदी

टोरंटो। लीमा समूह के सदस्य देशों ने वेनेजुएला के उच्च स्तरीय अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में प्रवेश करने पर रोक लगा दी है। लीमा समूह ने इसकी घोषणा सोमवार को औटवा में वेनेजुएला के मुद्दे पर हुई बैठक के बाद की। लीमा समूह ने कहा, हम लोग संबंधित राष्ट्रीय विधानों के अनुसार वेनेजुएला के उच्च-स्तरीय अधिकारियों को लीमा समूह के सदस्यों के क्षेत्रों में प्रवेश करने से रोकने के मुद्दे पर सहमत हुए हैं। उल्लेखनीय है कि लीमा समूह वेनेजुएला में लोकतांत्रिक सुधारों को बढ़ावा देने के लिए अगस्त 2017 में गठित 14 देशों का एक समूह है। यूरोपीय संघ के 19 सदस्य देशों और 11 लैटिन अमेरिकी देशों के एक समूह ने अमेरिका समर्थित नेशनल असेंबली के स्पीकर जुआन गुएडो को वेनेजुएला के अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में मान्यता दी है। यह कदम वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो को नए सिरे से राष्ट्रपति चुनाव कराने के अल्टीमेटम को अमल में लाने में विफल रहने पर उठाया गया है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को 17 सूत्रीय घोषणा में 14 सदस्यों वाले लीमा समूह के 11 देशों – अर्जेंटीना, ब्राजील, कैनेडा, चिली, कोलंबिया, कोस्टा रिका, ग्वाटेमाला, होंडुरास, पनामा, पैराग्वे और पेरू ने बल उपयोग के बिना और मानवीय सहायता की तत्काल आपूर्ति के साथ सत्ता परिवर्तन का आह्वान किया। समूह ने औटवा में एक बैठक के बाद घोषणा पत्र जारी किया। इन 11 देशों ने विश्व समुदाय से मदुरो शासन को विदेश में वित्तीय व व्यापार लेनदेन, वेनेजुएला की अंतराष्ट्रीय संपत्ति और तेल, सोना व अन्य में व्यापार करने से रोकने के लिए कठम उठाने का आग्रह किया है। इस दौरान हालांकि लीमा समूह के अन्य तीन देशों – गयाना, मेक्सिको और सैंट लूसिया ने इस घोषणा का समर्थन नहीं किया है। वहीं, सोमवार को ही 19 यूरोपीय देशों – स्पेन, पुर्तगाल, जर्मनी, ब्रिटेन, डेनमार्क, हॉलैंड, फ्रांस, हंगरी, ऑस्ट्रिया, फिनलैंड, बेल्जियम, लक्समबर्ग, चेक रिपब्लिक, लातविया, लिथुआनिया, एस्टोनिया, पोलैंड, स्वीडन और क्रोएशिया ने स्वतंत्र, निष्पक्ष और लोकतांत्रिक राष्ट्रपति चुनावों के आह्वान के साथ गुआइदो को समर्थन देने के संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे। एफे के अनुसार, इटली सहित नौ ईयू देशों ने संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है। वेनेजुएला के प्रमुख लेनदारों में से एक रूस ने यूरोपीय संघ के उस अल्टीमेटम को भी खारिज कर दिया जिसमें मदुरो से नए सिरे से चुनाव कराने के लिए कहा गया था।
अमेरिका ने यूरोपीय संघ से सदस्य देशों से वेनेजुएला में विपक्ष के नेता जुआन गुएडो को अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर स्वीकृति प्रदान करने की अपील की है। अमेरिका के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा, हम यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के साथ सभी देशों से गुएडो को वेनेजुएला अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर मान्यता देकर वहां निवासियों और संवैधानिक लोकतंत्र बहाल करने में नेशनल असेंबली के प्रयासों का समर्थन करने की अपील करते हैं। उल्लेखनीय है कि वेनेजुएला में जारी राजनीतिक संकट के बीच अमेरिका, ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, लातविया, लिथुआनिया, एस्टोनिया, चेक गणराज्य, पोलैंड, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड, पुर्तगाल, स्पेन और ब्रिटेन ने नेशनल असेंबली के नेता गुएडो को देश के अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर मंजूरी दे दी है। उधर, आयरलैंड, स्वीटरलैंड, नार्वे, इटली, यूनान तथा यूरोपीय संघ के अन्य देशों ने गुएडो को अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर मंजूरी नहीं दी है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका से वेनेजुएला के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने से बचने का आग्रह करते हुये कम से कम एक करोड़ लोगों का हस्ताक्षरित पत्र व्हाइट हाउस (अमेरिकी राष्ट्रपति भवन) को सौपा जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को सीबीएस प्रसारक के साथ एक साक्षात्कार में पुष्टि की थी कि वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप सही विकल्प था। मादुरो ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा, कम से कम एक करोड़ लोग इस पत्र पर हस्ताक्षर करेंगे। हम अधिकारों का सम्मान करने का आग्रह करते हुये यह पत्र व्हाइट हाउस को सौंपेंगे। वेनेजुएला के विपक्ष के नेतृत्व वाली नेशनल असेंबली के स्पीकर जुआन गोइदो ने 23 जनवरी को खुद को देश का अंतरिम राष्ट्रपति घोषित किया था। अमेरिका और कई अन्य देशों ने जुआन गुएडो का समर्थन किया था। रूस और चीन समेत कई अन्य देशों ने गुएडो का समर्थन करने से इन्कार करते हुये देश के वैध राष्ट्रपति के रूप में मादुरो का समर्थन किया था। इन देशों ने यह मांग भी की थी कि वेनेजुएला के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप ना करने के सिद्धांत का अन्य देश सम्मान करें।

Comments are closed.