प्रकृति के पुत्र और संस्कृति के प्रहरी हैं आदिवासी

विश्व आदिवासी दिवस, 9 अगस्त, केवल एक संवैधानिक औपचारिकता नहीं, बल्कि यह सभ्यता की जड़ों और संवेदनशीलता के स्रोत को स्मरण करने का दिन है। यह दिन न केवल आदिवासियों के अस्तित्व, अधिकारों यानी जल, जंगल, जमीन और उनके जीवन की रक्षा का उद्घोष है,…
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गणतंत्र दिवस : नये भारत को आकार देने के संकल्पों का गणतंत्र

-ललित गर्ग- गणतंत्र दिवस हमारा राष्ट्रीय पर्व है, इसी दिन 26 जनवरी, 1950 को हमारी संसद ने भारतीय संविधान को पास किया। इस दिन भारत ने खुद को संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया। तेहत्तर वर्षों में हमारा गणतंत्र कितनी ही कंटीली…
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पंजाब में हिंसा की उग्रता फिर नियति न बन जाये

-ललित गर्ग-देश की कृषि एवं महापुरुषों की शांति भूमि राजनीतिक कारणों से हिंसा, आतंकवाद एवं नशे की भूमि बन गयी है। जबसे आम आदमी पार्टी की सरकार (Aam Aadmi Party Government) बनी है, हिंसा, हथियारों एवं नशे की उर्वरा भूमि बनकर जीवन की…
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क्या ऋषि सुनक ब्रिटेन को चुनौतियों से उबार सकेंगे?

-ललित गर्ग- भारतीय मूल के ऋषि सुनक (Rishi Sunak) एक नया इतिहास रचते हुए ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री (Britain's new prime minister) की शपथ ले चुके हैं। उन्होंने पेनी मोरडॉन्ट को मात देते हुए जीत हासिल की है। कंजरवेटिव पार्टी का नेतृत्व…
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नारी-शक्ति की पूजा तभी सार्थक जब नारी अपराध रूकें

- ललित गर्ग - शारदीय नवरात्र (Sharadiya Navratri) मनाते हुए हम एक बार फिर स्त्री शक्ति के सम्मान के लिये बेटियों एवं महिलाओं के आदर एवं अस्तित्व की बात कर रहे हैं। यह देखना भी दिलचस्प है कि जहां साल में दो बार लड़कियों को महत्व देने के…
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नहीं रहे बिना रक्तपात शीत युद्ध खत्म कराने वाले मिखाइल गोर्बाचेव

टोरंटो । बीसवीं सदी के सबसे प्रभावशाली राजनेताओं में से एक एवं सोवियत संघ के अंतिम राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव (Mikhail Gorbachev, the last president of the Soviet Union) का यहां एक अस्पताल में निधन हो गया है। वह 91 वर्ष के थे। ग्लासनोस्ट…
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