नए रास्ते से पहुंचा जा सकेगा केदारनाथ धाम

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक केदारनाथ को स्वर्ग का द्वार कहा जाता है माना जाता है, जिसने भी यहां आकर भगवान के दर्शनों का सौभाग्य प्राप्त कर लिया उसके सात जन्मों का पुण्य मिल जाता है, लेकिन 16 जून के सैलाब के बाद न सिर्फ आस्था का यह द्वार बंद है, बल्कि पूरी केदार घाटी का रास्ता बंद पड़ा है। प्रशासन के मुताबिक स्वर्ग के द्वार केदारधाम का रास्ता खुलने में महीनों का वक्त लग सकता है, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए अछी खबर यह आई है कि केदारधाम जाने का दूसरा रास्ता मिल गया है।
केदारनाथ जाने वाले जिस रास्ते का पता मिला है, उसका इस्तेमाल सैकड़ों साल पहले हुआ करता था। उखीमठ से चौमासी होते हुए केदारनाथ जाने वो रास्ता बरसों से बंद है, लेकिन जानकारों की नजर में वो रास्ता वर्तमान रास्ते की तुलना में कम क्षतिग्रस्त हुआ है। केदारनाथ जाने के लिए जिस रूट का अभी इस्तेमाल होता है, वह हरिद्वार से शुरू होता है। केदारनाथ यात्रा का पहला पड़ाव हरिद्वार से 49 किलोमीटर दूर देवप्रयाग है। इसके बाद 32 किलोमीटर का सफर कर श्रद्धालु श्रीनगर पहुंचते हैं। श्रीनगर के बाद चढ़ाई तीखी होती है। यहां से तकरीबन 35 किलोमीटर के बाद रुद्रप्रयाग आता है, जो समुद्र तल से 2000 फीट की ऊंचाई पर है। रुद्रप्रयाग से 10 किलोमीटर बाद अगस्त्य मुनी धाम आता है और इसके बाद उखीमठ और फिर गुप्तकाशी।
गुप्तकाशी से लेकर गौरीकुंड तक सडक़ें बनी हैं। यहां तक गाडिय़ां भी आती हैं, लेकिन गौरीकुंड के आगे सब कुछ बंद है। केदारनाथ जाने का दूसरा रास्ता इन्हीं दोनों जगहों के बीच से शुरू होता है। चौमासी गांव से केदारनाथ 22 किलोमीटर दूर है। यहां से जाने वाले रास्ते को नुकसान भी कम हुआ है, लेकिन चौमासी गांव इलाके से पूरी तरह कट चुका है। स्थानीय लोगों की मदद से सेना ने केदरनाथ जाने का दूसरा रास्ता तो तलाश लिया है, लेकिन क्या उसे इतनी जल्द तैयार करना मुमकिन है। इस बारे में विशेषज्ञों की राय ली जा रही है।
केदारनाथ जाने के जिस नए रास्ते की बात हो रही है, वह दरअसल सदियों पुराना रास्ता है। इस रास्ते पहले केदारनाथ पहुंचने में एक महीने से भी यादा का वक्त लगता था। लेकिन जानकार कहते हैं, इस रास्ते को अगर फौरन दुरुस्त कर लिया जाए, तो केदार घाटी में पहुंचना नामुमकिन से आसान हो जाएगा। हालांकि इस रास्ते में चुनौतियां बहुत यादा है। इस रास्ते की पड़ताल में पर्वतारोहियों के साथ एनआईएम की टीम गई है, लेकिन नया रास्ता न सिर्फ पहले के मुकाबले लंबा है, बल्कि मुश्किल चुनौतियों से भी भरा है।
इतनी मुश्किलों के बाद भी अगर यह रास्ता खुल जाए तो केदारनाथ पहुंचने के साथ रास्ते में फंसे लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने और तबाह हुए गांवों को बसाने में कारगर हो सकता है। रास्ता मुश्किल होने के बाद भी इसे लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। हालांकि इस रास्ते के शुरू होने में वक्त करीब एक महीने के करीब लग जाएगा, लेकिन तबाही के बाद दुर्गम हो चुकी केदारघाटी में जीवन के संचार का रास्ता खुल जाएगा।

 

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