मोदी-जेटली ने कर दिखाया तो मनमोहन-चिदंबरम को हजम नहीं हुआ
वैश्विक एजेंसियों की रैंकिंग या रेटिंग का कई सन्दर्भों में महत्व होता है। रिपोर्ट नकारात्मक हुई तो सुधार का मनोवैज्ञानिक दबाव बनता है। सकारात्मक होने पर निवेश का माहौल बनता है। संबंधित देश की कम्पनियों को ऋण मिलना आसान हो जाता है। विदेशी…
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