
वॉशिंगटन। न्यूयॉर्क की एक रिपब्लिकन कांग्रेसवुमन ने कहा है कि वह एक कानून पेश कर रही हैं। इसके अंतर्गत ‘यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव’ को उन कैनेडियन प्रांतों की जांच करने के लिए मजबूर किया जाएगा जो अमेरिकी शराब नहीं खरीद रहे हैं। टेनी ने सोमवार को एक प्रेस रिलीज में कहा,’कैनेडियन प्रांतों को अमेरिकी वाइनरी, ब्रुअरी और डिस्टिलरी को बंधक बनाने और उनसे फिरौती वसूलने की कोशिश करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।’
‘अमेरिकी वाइनरी, ब्रुअरी, डिस्टिलरी और अन्य पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियों को कैनेडियन बाजार में निष्पक्ष पहुँच मिलनी चाहिए, न कि हमारे सबसे करीबी व्यापारिक साझेदारों में से एक से भेदभावपूर्ण व्यवहार।’ टेनी ने कहा कि वह सोमवार को अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में ‘कॉम्बैटिंग अटैक्स ऑन अवर नेशनल अल्कोहलिक ड्रिंक्स बाय अलाइज एक्ट’ अर्थात् कैनेडा एक्ट पेश करेंगी। इसका लक्ष्य 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत जांच शुरु करवाना है।
अगर उस जांच में अनुचित व्यापारिक तौर-तरीके पाए जाते हैं, तो अमेरिका टैरिफ या आयात पर अन्य प्रतिबंध लगाकर जवाब दे सकता है। पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ और कब्जे की धमकियों के जवाब में कैनेडा के कई प्रांतीय शराब बोर्डों ने अमेरिकी शराब खरीदना बंद कर दिया था।
हालाँकि शास्केचेवान और अल्बर्टा ने अमेरिकी शराब को दोबारा दुकानों में बेचना शुरू कर दिया है, लेकिन ओंटेरियो और क्यूबेक जैसे बड़े खरीददार प्रांतों ने अभी तक अमेरिकी शराब का स्टॉक फिर से शुरु नहीं किया है। ओंटेरियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने पिछले महीने वाशिंगटन में पत्रकारों से कहा था कि कैनेडा-अमेरिका-मेक्सिको व्यापार समझौता रिन्यू होने के बाद वह अमेरिकी शराब का स्वागत करेंगे।
उन्होंने कहा, ‘मैं बस इस डील को पूरा करना चाहता हूँ।’ ‘मैं आपको भरोसा दिलाता हूँ कि एक बार जब वह डील हो जाएगी, तो मैं बैठकर ओंटारियो में सभी शराब को वापस दुकानों में लाऊँगा।’ अमेरिका ने पिछले हफ्ते कहा था कि वह महाद्वीपीय व्यापार समझौते (जिसे कैनेडा में सीयूएसएमए के नाम से भी जाना जाता है) को रिन्यू नहीं करेगा, लेकिन बातचीत जारी रहने तक समझौता लागू रहेगा।
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इससे एक दशक तक चलने वाली सालाना समीक्षा प्रक्रिया शुरु हो गई, जिसके बाद अगर समय बढ़ाने पर सहमति नहीं बनी तो समझौता खत्म हो जाएगा। कैनेडा और मेक्सिको दोनों ने 16 साल के विस्तार की मांग की थी। ट्रंप के टैरिफ और ’51वें राज्य’ वाले बयानों से नाराज कैनेडियनस ने राज्यों के उस कदम का समर्थन किया था जिसके तहत अमेरिकी शराब को दुकानों से हटा दिया गया था, जबकि औटवा पिछले साल ट्रंप की व्हाइट हाउस में उथल-पुथल भरी वापसी से निपट रहा था।