
टोरंटो। ओंटेरियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने अपनी कैबिनेट में कई बदलावों की सार्वजनिक घोषणा की हैं। इनमें डेविड पिचिनी को एक नया पोर्टफोलियो देना भी शामिल है, जबकि ‘स्किल्स डेवलपमेंअ फंड’ के कामकाज को लेकर इंटीग्रिटी कमिश्नर की जांच अभी चल रही है। कैबिनेट में फेरबदल के तहत पिचिनी को ओंटेरियो का नया इंफ्रास्ट्रक्चर मंत्री बनाया गया है, उन्होंने किंगा सुरमा की जगह ली है। जो अब ट्रेजरी बोर्ड की प्रेसिडेंट का पद संभालेंगी। जून में कैरोलीन मुलरोनी के इस्तीफे के बाद से यह पद खाली हो गया था।
ट्रेवर जोन्स, पिचिनी की जगह लेबर, इमिग्रेशन, ट्रेनिंग और स्किल्स डेवलपमेंट मिनिस्टर का पद संभालेंगे। जोन्स पहले एग्रीकल्चर, फूड और एग्रीबिज़नेस मिनिस्टर थे; अब यह जिम्मेदारी नियाग्रा के एमपीपी सैम ओस्टरहॉफ संभालेंगे। ओंटेरियो के इंटीग्रिटी कमिश्नर ने पिछले साल दिसंबर में पिचिनी द्वारा स्किल डेवलपमेंट फंड के मैनेजमेंट की जांच शुरु की थी। यह जांच तब शुरु हुई जब ओंटेरियो के ऑडिटर जनरल ने पाया कि 2.5 बिलियन डॉलर के इस फंड जो डिमांड वाले प्रोफेशन के लिए वर्करों को ट्रेनिंग देने के मकसद से बनाया गया था आवेदकों का सिलेक्शन निष्पक्ष, पारदर्शी या जवाबदेह नहीं था।
ऑडिटर जनरल ने आखिर में स्किल्स डेवलपमेंट फंड (एसडीएफ) से लगभग 750 मिलियन डॉलर की ग्रांट की पहचान की, जो पॉलिटिकल स्टाफ द्वारा चुने गए आवेदकों को दी गई थीं। पिचिनी ने फंड के अपने मैनेजमेंट का बचाव किया है और पहले कहा है कि यह जरुरी है कि चुने हुए प्रतिनिधियों की ‘आखिरकार इस बात में राय हो कि ये ग्रांट कहाँ जा रही हैं।’
इस बीच, इंटीग्रिटी कमिश्नर की जांच जारी है। गुरुवार को पत्रकारों ने फोर्ड से पूछा कि क्या पिचिनी को नए पोर्टफोलियो में भेजने का फैसला स्किल डेवलपमेंट फंड के उनके मैनेजमेंट से जुड़ा था, लेकिन उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है और इसे पिचिनी के लिए एक ‘अच्छा कदम’ बताया।
उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह एक स्वाभाविक कदम है। उन्होंने पिछले दो सालों में लगभग 750,000 लोगों को ट्रेनिंग दी है और अब इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में जाना एक स्वाभाविक कदम है।’ ‘हमारे पास लगभग 235 बिलियन डॉलर का इंफ्रास्ट्रक्चर है, चाहे वह नॉर्थ अमेरिका का सबसे बड़ा ट्रांजिट सिस्टम बनाने में 80 बिलियन डॉलर हो, 50 हॉस्पिटल बनाने में 64 बिलियन डॉलर हो या स्कूलों और लॉन्ग-टर्म केयर पर 30 बिलियन डॉलर हो, इसलिए यह एक स्वाभाविक कदम है।’
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एक बयान में, एनडीपी प्रमुख मैरिट स्टाइल्स ने इस फेरबदल को – जिसमें पिचिनी को कैबिनेट में बनाए रखने का फैसला भी शामिल है – ‘एक लडख़ड़ाते प्रीमियर की हताशा भरी हरकत’ बताया। स्टाइल्स ने कहा, ‘डेविड पिचिनी लेबर मिनिस्टर के तौर पर अपने कामों के लिए इंटीग्रिटी कमिश्नर की जांच के दायरे में हैं।
उन्होंने एक अहम पब्लिक फंड का गलत मैनेजमेंट किया, जिसमें उन्होंने अपने करीबी लोगों और लॉबिस्टों को फायदा पहुँचाया, जबकि उन्हें मिलने वाले डोनेशन में भारी बढ़ोतरी हुई। जवाबदेही तय करने के बजाय, प्रीमियर ने उन्हें एक और नौकरी देकर इनाम दिया। यह बेतुका है। उनका ट्रैक रिकॉर्ड दिखाता है कि पब्लिक के पैसे और कॉन्ट्रैक्ट के मामले में उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता।’ फोर्ड के कैबिनेट में यह फेरबदल गर्मियों के दौरान तीन अलग-अलग मंत्रियों के इस्तीफे के बाद हुआ है।
