
टोरंटो। क्यूबेक और मोनार्की से उसके रिश्तों के लिए बुधवार एक ऐतिहासिक दिन रहा। यह पहली बार होगा जब राजशाही के प्रतिनिधि लेफ्टिनेंट-गवर्नर नेशनल असेंबली में नई सरकार के कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह की अध्यक्षता नहीं करेंगे। लेफ्टिनेंट गवर्नर मैनन जीनोटे के ऑफिस ने कन्फर्म किया है कि उन्होंने क्यूबेक के नए प्रीमियर पॉल सेंट-पियरे प्लामोंडन की लिखित रिक्वेस्ट मान ली है कि वे इवेंट में शामिल न हों और वे अपने पास के ऑफिस से स्क्रीन पर इवेंट देखेंगी।
सेंट-पियरे प्लामोंडन ने लिखा, ‘हमारा दृढ़ इरादा है कि क्यूबेक में इस राजशाही को खत्म किया जाएं, हमारे लोकतांत्रिक संस्थानों और हमारे नागरिक समाज, दोनों ही स्तरों पर।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हम आपके सहयोग के लिए पहले से ही धन्यवाद देते हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हमारे लोकतंत्र के लिए यह महत्वपूर्ण दिन बिना किसी रुकावट के संपन्न हो और क्यूबेक की नेशनल असेंबली के चुने हुए सदस्यों की इच्छा का सम्मान किया जाए।’
राजशाही-विरोधी एजेंडे के सामने कानूनी अड़चन
इस बीच, नई सरकार के राजशाही-विरोधी एजेंडे के सामने एक कानूनी अड़चन आ गई है।
2022 के क्यूबेक कानून को चुनौती देने वाले वकीलों में से एक का कहना है कि चुने गए प्रतिनिधियों के लिए राजा के प्रति शपथ लेने को वैकल्पिक बनाने वाले इस कानून के खिलाफ, आपातकालीन रोक की उनकी याचिका पर मंगलवार को अदालत में सुनवाई होगी।
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लॉरेंस डेविड ने एक ईमेल में कहा कि उन्हें जज इयान डेमर्स से जल्द फैसले की उम्मीद है, लेकिन ‘अगर हम नहीं जीतते हैं, तो हम इस फैसले के खिलाफ 100 प्रतिशत अपील करेंगे।’
बिल 4 को निलंबित करने की मांग
इस महीने की शुरुआत में, ‘पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन इंस्टीट्यूट’ के संस्थापक डेविड ने एक आपातकालीन रोक की याचिका दायर की थी। इसका मकसद नई क्यूबेक सरकार को राजा चार्ल्स के प्रति निष्ठा की शपथ लेने के लिए मजबूर करना था।
इस याचिका में अदालत से 2022 के प्रांतीय कानून—जिसे ‘बिल 4′ के नाम से जाना जाता है—को तुरंत निलंबित करने की मांग की गई है। इस कानून के तहत नेशनल असेंबली के सदस्यों के लिए राजा के प्रति शपथ लेना वैकल्पिक हो गया था।
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डेविड ने इसी मामले को लेकर अगस्त में भी एक मुकदमा दायर किया था। ‘बिल 4′ के जरिए 1867 के संविधान अधिनियम में एक नया प्रावधान जोड़ा गया, जिसके अनुसार क्यूबेक के विधायकों पर राजा के प्रति शपथ लेने की अनिवार्यता अब लागू नहीं होती।
सीएक्यू सरकार के दबाव के बाद पेश हुआ था बिल
क्यूबेक के दबाव के बाद, ‘कोएलिशन एवेनिर क्यूबेक’ (सीएक्यू) सरकार ने इस बिल को पेश किया था। सीएक्यू के कई सदस्यों ने राजा चार्ल्स के प्रति निष्ठा की शपथ लेने से इनकार कर दिया था, जिसके चलते उन्हें सदन में बैठने से रोक दिया गया था।
