
ओंटेरियो। ओंटेरियो की कोर्ट ऑफ अपील ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए कहा है कि टोरंटो की तीन मुख्य सड़कों से बाइक लेन हटाना चार्टर अधिकारों का उल्लंघन नहीं है और इस प्रस्ताव को कार्यन्वित किया जा सकता है।
फोर्ड सरकार ने पहले 2024 में एक कानून पास किया था जिसके तहत वह ब्लूर स्ट्रीट, योंग स्ट्रीट और यूनिवर्सिटी एवेन्यू से बाइक लेन हटाई जा सकती थी। लेकिन 2025 के एक फैसले में, ओंटेरियो सुपीरियर कोर्ट के जस्टिस पॉल शाबास ने पाया कि राज्य की योजना ‘कैनेडियन चार्टर ऑफ राइट्स एंड फ्रीडम्स’ का उल्लंघन करती है क्योंकि इससे लोगों को चोट लगने और मौत का अधिक खतरा होगा, जो जीवन और व्यक्तिगत सुरक्षा के अधिकार से जुड़ा मामला है।
शुक्रवार को जारी कोर्ट के एक फैसले में, ओंटेरियो की अपील कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से पाया कि ‘ओंटेरियो की विधानसभा बाइक लेन बनाने के लिए उतनी ही स्वतंत्र है जितनी कि उन्हें हटाने या हटाने की मंजूरी देने के लिए।’
फैसले में यह भी कहा गया है, ‘बाइक लेन के लिए कोई चार्टर अधिकार नहीं है, न तो विशेष रूप से और न ही चार्टर में बताए गए किसी अधिकार से ऐसा कोई निष्कर्ष निकलता है।’ बाइक लेन का होना पूरी तरह से कानून पर निर्भर करता है।’ प्रीमियर डग फोर्ड ने पहले निचली अदालत के फैसले को ‘बेतुका’ बताया था और आरोप लगाया था कि शाबास ने ओंटेरियो के लोगों की राय को कानून के कारण नहीं, बल्कि विचारधारा के कारण नजरअंदाज किया गया।
अपने फैसले में, तीन जजों की बेंच ने कहा कि चार्टर में इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है कि बाइक लेन अच्छा विचार है या बुरा – समझदारी भरी नीति है या नहीं और ये फैसले ‘अदालतों का काम’ नहीं होने चाहिए। फैसले में आगे कहा गया है कि शाबास ने कानून की प्रभावशीलता के बारे में चिंताओं पर ध्यान केंद्रित करके गलती की और अंतत: ऐसा फैसला सुनाया जो न केवल कानून की, बल्कि इसे पास कराने में सरकार के व्यवहार की आलोचना से भी भरा था।
फैसले में कहा गया है, मुख्य बात यह है सड़कों के इस्तेमाल को किसी खास तरीके से रेगुलेट करने की कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं है, न तो बाइक लेन बनाने की और न ही बनी हुई लेन को बनाए रखने की कोई संवैधानिक बाध्यता है। ‘विधानसभा किसी सड़क से बाइक लेन हटाने के लिए कानून बनाने के लिए स्वतंत्र है – असल में, वह सड़क को पूरी तरह से हटा सकती है – बिना चार्टर का उल्लंघन किए और खासकर, बिना किसी के अधिकारों का उल्लंघन किए।’
