
टोरंटो। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान डिएप रेड कैनेडा के लिए सबसे घातक दिन था, लेकिन अक्सर डी-डे के दौरान जूनो बीच पर कैनेडा की कामयाबी के आगे यह घटना दब जाती है। 19 अगस्त, 1942 को, लगभग 5,000 कैनेडियन सैनिकों ने फ्रांस के डिएप के पथरीले समुद्र तट पर हमला किया।
ऑपरेशन जुबली के दौरान 900 से अधिक कैनेडियन सैनिक मारे गए और 2,000 अन्य को जर्मन सैनिकों ने बंदी बना लिया। साथ ही, मित्र देशों के 210 सैनिक, जिनमें अधिकतर ब्रिटिश थे, वे भी मारे गए। इस हमले की 84वीं बरसी पर रविवार दोपहर डिएप में एक समारोह आयोजित कर उन सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई।
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डिएप मिलिट्री वेटरन्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सिल्वेन बोलियान ने कहा कि समुद्र तटों पर जान गंवाने वाले बहादुर सैनिकों को याद रखना कैनेडियनस का कर्तव्य है।
बोलियान ने कहा, ‘कुछ ही घंटों में 900 से अधिक कैनेडियनस की जान चली गई, ठीक-ठीक कहें तो 922 लोग मारे गए। लगभग 2,000 लोगों को बंदी बना लिया गया और कई अन्य घायल हो गए। हर आंकड़े के पीछे एक बेटा, भाई, पति, पिता और दोस्त था, जिसके बलिदान ने पीछे रह गए लोगों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी।’
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यह हमला नाजी-कब्जे वाले फ्रांस पर जर्मन तटीय सुरक्षा की मजबूती को परखने के लिए किया गया एक जल-थल हमला था। डिएप मिलिट्री वेटरन्स एसोसिएशन के रिटायर्ड मेजर गैरी स्कॉट का मानना है कि कैनेडा में डिएप की लड़ाई को लोग कुछ हद तक भूल चुके हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि इससे 6 जून, 1944 को ऑपरेशन ओवरलॉर्ड के लिए जरुरी सबक मिले, जब मित्र देशों की सेनाओं ने नॉरमैंडी के समुद्र तटों पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की थी।
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