चिंता: औटवा के अधिकतर नागरिकों को अपने परिजनों के बेघर होने का डर सता रहा है: सर्वे
सर्वे में सामने आई बेघर होने की बढ़ती चिंता

औटवा। ‘औटवा मिशन’ के लिए कराए गए एक नए सर्वे के अनुसार, औटवा के अधिकतर नागरिकों को लगता है कि वे स्वयं या उनके जानने वाला कोई व्यक्ति कभी भी बेघर हो सकता है। ‘नैनोस रिसर्च’ ने 25 सितंबर से 6 अक्टूबर के बीच औटवा के 815 लोगों का सर्वे किया। सर्वे में पाया गया कि आधे से अधिक लोगों का मानना है कि उनके जानने वाले किसी व्यक्ति के बेघर होने का कुछ न कुछ खतरा है। इनमें से 38 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें लगता है कि उनके किसी करीबी के बेघर होने का थोड़ा खतरा है, 13 प्रतिशत ने इसे मध्यम खतरा बताया और 5 प्रतिशत ने इसे बड़ा खतरा माना। वहीं, 43 प्रतिशत लोगों का कहना था कि उन्हें नहीं लगता कि उनके किसी करीबी के बेघर होने का कोई खतरा है।
2019 के मुकाबले बढ़ी बेघर होने की आशंका
2019 में हुए एक ऐसे ही सर्वे में बेघर होने का खतरा कम माना गया था, तब 53 प्रतिशत लोगों ने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि उनके किसी करीबी के बेघर होने का कोई खतरा है। उस समय 31 प्रतिशत लोगों ने इस खतरे को थोड़ा बताया था तो 10 प्रतिशत ने खतरे को मध्यम कहा और 5 प्रतिशत ने उस समय इस खतरे को बड़ा बताया था। खुद के बेघर होने के खतरे को लेकर भी लोगों की राय में थोड़ा बदलाव आया है। सर्वे में अब 24 प्रतिशत लोगों ने माना कि उनके खुद के बेघर होने का थोड़ा खतरा है, जबकि 3 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनके बेघर होने का खतरा बड़ा है। ज्ञात हो कि वर्ष 2019 में यह 2 प्रतिशत था। दोनों सर्वे में मध्यम खतरा बताने वाले लोग केवल 6 प्रतिशत थे और 1 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे इस बारे में पक्का नहीं कह सकते।
किफायती आवास की कमी को भी मान रहे मुख्य कारण
सर्वे में शामिल लोगों के अनुसार, बेघर होने का सबसे बड़ा कारण नशा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं, लेकिन अब अधिक लोग ‘किफायती आवास की कमी’ को भी एक मुख्य समस्या मानते हैं। 2019 में 62 प्रतिशत लोगों ने कहा था कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं एवं नशा, बेघर होने के मुख्य कारण हैं। 2026 में यह आंकड़ा घटकर 54 प्रतिशत रह गया। 2026 के सर्वे में शामिल 23 प्रतिशत लोगों ने माना कि किफायती आवास की कमी भी इसका मुख्य कारण है, जबकि 2019 में यह आंकड़ा 17 प्रतिशत था।
बेघर होने की समस्या से निपटना सभी की जिम्मेदारी
अधिकांश लोगों का कहना था कि बेघर होने की समस्या से निपटना हर किसी की जिम्मेदारी है, इसमें सरकार के सभी स्तरों से लेकर आम लोग, चैरिटी संस्थाएं और धार्मिक संगठन शामिल हैं।
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सर्वे में शामिल 42 प्रतिशत लोगों ने यह भी कहा कि बेघर होने की समस्या से निपटने के लिए हर कोई जिम्मेदार है, जबकि 2019 में यही आंकड़ा 38 प्रतिशत था। 19 प्रतिशत लोगों का मानना था कि सबसे अधिक जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है, जबकि 17 प्रतिशत लोगों ने नगर पालिकाओं को सबसे अधिक जिम्मेदार माना। वहीं, 16 प्रतिशत लोगों ने राज्य सरकारों को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया। लगभग 1 प्रतिशत लोगों का कहना था कि बेघर होने की समस्या से निपटने के लिए धार्मिक और/या चैरिटी संस्थाओं की जिम्मेदारी सबसे अधिक होनी चाहिए।
परिवार और दोस्तों की जिम्मेदारी को लेकर बदली सोच
2019 और 2026 के बीच, बेघर लोगों के परिवार और दोस्तों की जिम्मेदारी को लेकर लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया। 2019 में, 14 प्रतिशत लोगों का मानना था कि बेघर होने की समस्या को दूर करने में परिवार और दोस्तों की जिम्मेदारी सबसे अधिक है, जबकि 2026 में यह आंकड़ा घटकर 5 प्रतिशत रह गया।
