देश में एकता की रक्षा के लिए सदैव तत्पर : मार्क कार्नी

औटवा। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने एक बार फिर कहा कि अल्बर्टा में होने वाले अलगाव के जनमत संग्रह में कैनेडा की ‘सबसे भरोसेमंद, विश्वसनीय और पसंदीदा देशों’ में से एक के तौर पर बनी-बनाई प्रतिष्ठा इस समय दांव पर लगी है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अलग होने के पक्ष में वोट करने से सबसे बुरे समय में सालों तक अनिश्चितता बनी रहेगी।
गुरुवार को सत्र के समापन पर पत्रकारों से बात करते हुए प्रधानमंत्री कार्नी ने कहा कि वह गर्मियों का कुछ समय अल्बर्टा के लोगों को यह समझाने में बिताएंगे कि हाल ही के समय में कैनेडा पहले से भी ‘अच्छा’ देश बन रहा है, फिर भी कुछ मुद्दों पर ‘हम और बेहतर हो सकते हैं’। कार्नी ने कहा कि वहां के मतदाताओं के लिए उनका ‘मुख्य संदेश’ यह है कि उनके राज्य को औटवा में एक इच्छुक साथी मिला है जो कैनेडा की संसाधन संपदा और प्रशांत क्षेत्र तक संभावित पाइपलाइन विकसित करने के लिए उत्सुक है।
उन्होंने अल्बर्टा की प्रीमियर डेनियल स्मिथ के साथ इन और अन्य मुद्दों पर हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) का हवाला देते हुए कहा कि यह इस बात का संकेत है कि उनके नेतृत्व में औटवा में चीजें बदली हैं और अब ‘कॉओपरेटिव फेडरल्जीम’ का दौर है। उन्होंने कहा, ‘हमें व्यापार करने के लिए सबसे भरोसेमंद, विश्वसनीय और पसंदीदा देशों में से एक माना जाता है और हमें इस समय दुनिया के अन्य देशों का विश्वास खोना नहीं चाहिए।’
सीमा के दक्षिण में संरक्षणवादी नीतियों और अन्य जगहों पर भू-राजनीति क तनाव के कारण दुनिया पहले से ही ‘बुनियादी तौर पर अनिश्चित’ स्थिति में है। उन्होंने कहा कि कैनेडा का अकेले आगे बढऩे का फैसला हालात को और खराब कर देगा। ब्रेक्जिट के अपने अनुभव को याद करते हुए, जो ठीक 10 साल पहले इसी हफ्ते हुए एक वोट के कारण हुआ था।
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कार्नी ने कहा कि इस पतझड़ में होने वाले जनमत संग्रह के सवाल पर ‘हां’ में वोट – जो असल में इस बात पर वोट है कि क्या अलग होने के स्पष्ट सवाल के साथ एक और जनमत संग्रह कराया जाए, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय जीवन को बाधित करेगा।कार्नी ने कहा, ‘यह एक वास्तविक जनमत संग्रह है। यह किसी सवाल के बारे में सवाल नहीं है। यह एक खुला विकल्प है।’
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कार्नी ने कहा, ‘मैंने खुद देखा है कि क्या हुआ था, ऐसे जनमत संग्रहों में क्या-क्या दावे किए जाते हैं। कहा जाता है कि ‘सब कुछ आसान होगा, आप अपना पासपोर्ट रख सकते हैं, आप करेंसी रख सकते हैं, आप देश में रह सकते हैं और साथ ही उसे आसानी से छोड़ भी सकते हैं आदि।’ लेकिन बाद में वास्तविकता का सामना करवाया जाता हैं कि आप अकेले होने पर कितनी परेशानी में पड़ गए हो, बस यहीं बात आम जनता को समझानी हैं।
